महाभारत 4.1.14विराटनगरे तात संवत्सरमिमं वयम्कुर्वन्तस्तस्य कर्माणि विहरिष्याम भारतvirāṭanagare tāta saṃvatsaramimaṃ vayamkurvantastasya karmāṇi vihariṣyāma bhārataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें