महाभारत 4.12.23
भ्रामयित्वा शतगुणं गतसत्त्वमचेतनम्प्रत्यपिंषन्महाबाहुर्मल्लं भुवि वृकोदरः
bhrāmayitvā śataguṇaṃ gatasattvamacetanampratyapiṃṣanmahābāhurmallaṃ bhuvi vṛkodaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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