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महाभारत 4.12.2
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
एवं ते न्यवसंस्तत्र प्रच्छन्नाः कुरुनन्दनाःआराधयन्तो राजानं यदकुर्वन्त तच्छृणु
evaṃ te nyavasaṃstatra pracchannāḥ kurunandanāḥārādhayanto rājānaṃ yadakurvanta tacchṛṇu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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