महाभारत 4.12.32
एवं ते न्यवसंस्तत्र प्रच्छन्नाः पुरुषर्षभाःकर्माणि तस्य कुर्वाणा विराटनृपतेस्तदा
evaṃ te nyavasaṃstatra pracchannāḥ puruṣarṣabhāḥkarmāṇi tasya kurvāṇā virāṭanṛpatestadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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