महाभारत 4.12.4
स ह्यक्षहृदयज्ञस्तान्क्रीडयामास पाण्डवःअक्षवत्यां यथाकामं सूत्रबद्धानिव द्विजान्
sa hyakṣahṛdayajñastānkrīḍayāmāsa pāṇḍavaḥakṣavatyāṃ yathākāmaṃ sūtrabaddhāniva dvijān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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