महाभारत 4.12.6
भीमसेनोऽपि मांसानि भक्ष्याणि विविधानि चअतिसृष्टानि मत्स्येन विक्रीणाति युधिष्ठिरे
bhīmaseno'pi māṃsāni bhakṣyāṇi vividhāni caatisṛṣṭāni matsyena vikrīṇāti yudhiṣṭhire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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