महाभारत 4.14.5
पर्विणीं त्वं समुद्दिश्य सुरामन्नं च कारयतत्रैनां प्रेषयिष्यामि सुराहारीं तवान्तिकम्
parviṇīṃ tvaṃ samuddiśya surāmannaṃ ca kārayatatraināṃ preṣayiṣyāmi surāhārīṃ tavāntikam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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