महाभारत 4.14.7
कीचकस्तु गृहं गत्वा भगिन्या वचनात्तदासुरामाहारयामास राजार्हां सुपरिस्रुताम्
kīcakastu gṛhaṃ gatvā bhaginyā vacanāttadāsurāmāhārayāmāsa rājārhāṃ suparisrutām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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