महाभारत 4.15.19
सर्वलोकमिमं हन्युर्धर्मपाशसितास्तु येतेषां मां मानिनीं भार्यां सूतपुत्रः पदावधीत्
sarvalokamimaṃ hanyurdharmapāśasitāstu yeteṣāṃ māṃ māninīṃ bhāryāṃ sūtaputraḥ padāvadhīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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