महाभारत 4.15.32
भर्तारमनुरुध्यन्त्यः क्लिश्यन्ते वीरपत्नयःशुश्रूषया क्लिश्यमानाः पतिलोकं जयन्त्युत
bhartāramanurudhyantyaḥ kliśyante vīrapatnayaḥśuśrūṣayā kliśyamānāḥ patilokaṃ jayantyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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