महाभारत 4.16.2
कृत्वा शौचं यथान्यायं कृष्णा वै तनुमध्यमागात्राणि वाससी चैव प्रक्षाल्य सलिलेन सा
kṛtvā śaucaṃ yathānyāyaṃ kṛṣṇā vai tanumadhyamāgātrāṇi vāsasī caiva prakṣālya salilena sā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें