महाभारत 4.17.26
यमुपासन्त राजानः सभायामृषिभिः सहतमुपासीनमद्यान्यं पश्य पाण्डव पाण्डवम्
yamupāsanta rājānaḥ sabhāyāmṛṣibhiḥ sahatamupāsīnamadyānyaṃ paśya pāṇḍava pāṇḍavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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