महाभारत 4.17.29
एवं बहुविधैर्दुःखैः पीड्यमानामनाथवत्शोकसागरमध्यस्थां किं मां भीम न पश्यसि
evaṃ bahuvidhairduḥkhaiḥ pīḍyamānāmanāthavatśokasāgaramadhyasthāṃ kiṃ māṃ bhīma na paśyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें