महाभारत 4.18.12
यस्य ज्यातलनिर्घोषात्समकम्पन्त शत्रवःस्त्रियो गीतस्वनं तस्य मुदिताः पर्युपासते
yasya jyātalanirghoṣātsamakampanta śatravaḥstriyo gītasvanaṃ tasya muditāḥ paryupāsate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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