महाभारत 4.18.9
यः सदेवान्मनुष्यांश्च सर्पांश्चैकरथोऽजयत्सोऽयं राज्ञो विराटस्य कन्यानां नर्तको युवा
yaḥ sadevānmanuṣyāṃśca sarpāṃścaikaratho'jayatso'yaṃ rājño virāṭasya kanyānāṃ nartako yuvā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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