महाभारत 4.19.2
विक्रियां पश्य मे तीव्रां राजपुत्र्याः परंतपआसे कालमुपासीना सर्वं दुःखं किलार्तवत्
vikriyāṃ paśya me tīvrāṃ rājaputryāḥ paraṃtapaāse kālamupāsīnā sarvaṃ duḥkhaṃ kilārtavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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