महाभारत 4.2.19हिमवानिव शैलानां समुद्रः सरितामिवत्रिदशानां यथा शक्रो वसूनामिव हव्यवाट्himavāniva śailānāṃ samudraḥ saritāmivatridaśānāṃ yathā śakro vasūnāmiva havyavāṭइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें