महाभारत 4.2.20मृगाणामिव शार्दूलो गरुडः पततामिववरः संनह्यमानानामर्जुनः किं करिष्यतिmṛgāṇāmiva śārdūlo garuḍaḥ patatāmivavaraḥ saṃnahyamānānāmarjunaḥ kiṃ kariṣyatiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें