महाभारत 4.2.25
प्रजानां समुदाचारं बहु कर्मकृतं वदन्छादयिष्यामि कौन्तेय माययात्मानमात्मना
prajānāṃ samudācāraṃ bahu karmakṛtaṃ vadanchādayiṣyāmi kaunteya māyayātmānamātmanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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