महाभारत 4.2.27एतेन विधिना छन्नः कृतकेन यथा नलःविहरिष्यामि राजेन्द्र विराटभवने सुखम्etena vidhinā channaḥ kṛtakena yathā nalaḥvihariṣyāmi rājendra virāṭabhavane sukhamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें