महाभारत 4.21.13
अवबोधाद्धि भीतास्मि गन्धर्वाणां यशस्विनाम्एवं मे प्रतिजानीहि ततोऽहं वशगा तव
avabodhāddhi bhītāsmi gandharvāṇāṃ yaśasvināmevaṃ me pratijānīhi tato'haṃ vaśagā tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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