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महाभारत 4.21.32
सत्यं भ्रातॄंश्च धर्मं च पुरस्कृत्य ब्रवीमि तेकीचकं निहनिष्यामि वृत्रं देवपतिर्यथा
satyaṃ bhrātṝṃśca dharmaṃ ca puraskṛtya bravīmi tekīcakaṃ nihaniṣyāmi vṛtraṃ devapatiryathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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