महाभारत 4.21.7
तस्यां रात्र्यां व्यतीतायां प्रातरुत्थाय कीचकःगत्वा राजकुलायैव द्रौपदीमिदमब्रवीत्
tasyāṃ rātryāṃ vyatītāyāṃ prātarutthāya kīcakaḥgatvā rājakulāyaiva draupadīmidamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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