महाभारत 4.22.8
पराक्रमं तु सूतानां मत्वा राजान्वमोदतसैरन्ध्र्याः सूतपुत्रेण सह दाहं विशां पते
parākramaṃ tu sūtānāṃ matvā rājānvamodatasairandhryāḥ sūtaputreṇa saha dāhaṃ viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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