महाभारत 4.23.19
कन्या ऊचुःदिष्ट्या सैरन्ध्रि मुक्तासि दिष्ट्यासि पुनरागतादिष्ट्या विनिहताः सूता ये त्वां क्लिश्यन्त्यनागसम्
kanyā ūcuḥdiṣṭyā sairandhri muktāsi diṣṭyāsi punarāgatādiṣṭyā vinihatāḥ sūtā ye tvāṃ kliśyantyanāgasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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