महाभारत 4.25.17
तस्मान्मानसमव्यग्रं कृत्वा त्वं कुरुनन्दनकुरु कार्यं यथोत्साहं मन्यसे यन्नराधिप
tasmānmānasamavyagraṃ kṛtvā tvaṃ kurunandanakuru kāryaṃ yathotsāhaṃ manyase yannarādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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