महाभारत 4.25.4
अस्य वर्षस्य शेषं चेद्व्यतीयुरिह पाण्डवाःनिवृत्तसमयास्ते हि सत्यव्रतपरायणाः
asya varṣasya śeṣaṃ cedvyatīyuriha pāṇḍavāḥnivṛttasamayāste hi satyavrataparāyaṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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