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महाभारत 4.27.4
यथैष ब्राह्मणः प्राह द्रोणः सर्वार्थतत्त्ववित्सर्वलक्षणसंपन्ना नाशं नार्हन्ति पाण्डवाः
yathaiṣa brāhmaṇaḥ prāha droṇaḥ sarvārthatattvavitsarvalakṣaṇasaṃpannā nāśaṃ nārhanti pāṇḍavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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