महाभारत 4.29.4
असकृन्मत्स्यराज्ञा मे राष्ट्रं बाधितमोजसाप्रणेता कीचकश्चास्य बलवानभवत्पुरा
asakṛnmatsyarājñā me rāṣṭraṃ bādhitamojasāpraṇetā kīcakaścāsya balavānabhavatpurā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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