महाभारत 4.30.21
वीराङ्गरूपाः पुरुषा नागराजकरोपमाःनेमे जातु न युध्येरन्निति मे धीयते मतिः
vīrāṅgarūpāḥ puruṣā nāgarājakaropamāḥneme jātu na yudhyeranniti me dhīyate matiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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