महाभारत 4.31.9
असिभिः पट्टिशैः प्रासैः शक्तिभिस्तोमरैरपिसंरब्धाः समरे राजन्निजघ्नुरितरेतरम्
asibhiḥ paṭṭiśaiḥ prāsaiḥ śaktibhistomarairapisaṃrabdhāḥ samare rājannijaghnuritaretaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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