महाभारत 4.32.32
भीमस्तु भीमसंकाशो रथात्प्रस्कन्द्य कुण्डलीत्रिगर्तराजमादत्त सिंहः क्षुद्रमृगं यथा
bhīmastu bhīmasaṃkāśo rathātpraskandya kuṇḍalītrigartarājamādatta siṃhaḥ kṣudramṛgaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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