महाभारत 4.33.12
त्वया परिषदो मध्ये श्लाघते स नराधिपःपुत्रो ममानुरूपश्च शूरश्चेति कुलोद्वहः
tvayā pariṣado madhye ślāghate sa narādhipaḥputro mamānurūpaśca śūraśceti kulodvahaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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