महाभारत 4.35.7
अथैतद्वचनं मेऽद्य नियुक्ता न करिष्यसिप्रणयादुच्यमाना त्वं परित्यक्ष्यामि जीवितम्
athaitadvacanaṃ me'dya niyuktā na kariṣyasipraṇayāducyamānā tvaṃ parityakṣyāmi jīvitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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