महाभारत 4.36.31
तदेवैतच्छिरोग्रीवं तौ बाहू परिघोपमौतद्वदेवास्य विक्रान्तं नायमन्यो धनंजयात्
tadevaitacchirogrīvaṃ tau bāhū parighopamautadvadevāsya vikrāntaṃ nāyamanyo dhanaṃjayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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