महाभारत 4.36.47तत एनं विचेष्टन्तमकामं भयपीडितम्रथमारोपयामास पार्थः प्रहरतां वरःtata enaṃ viceṣṭantamakāmaṃ bhayapīḍitamrathamāropayāmāsa pārthaḥ praharatāṃ varaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें