महाभारत 4.38.17
तेषां विमुच्यमानानां धनुषामर्कवर्चसाम्विनिश्चेरुः प्रभा दिव्या ग्रहाणामुदयेष्विव
teṣāṃ vimucyamānānāṃ dhanuṣāmarkavarcasāmviniśceruḥ prabhā divyā grahāṇāmudayeṣviva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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