महाभारत 4.38.25इमे च कस्य नाराचाः सहस्रा लोमवाहिनःसमन्तात्कलधौताग्रा उपासङ्गे हिरण्मयेime ca kasya nārācāḥ sahasrā lomavāhinaḥsamantātkaladhautāgrā upāsaṅge hiraṇmayeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें