महाभारत 4.38.27कस्यायमसितावापः पञ्चशार्दूललक्षणःवराहकर्णव्यामिश्रः शरान्धारयते दशkasyāyamasitāvāpaḥ pañcaśārdūlalakṣaṇaḥvarāhakarṇavyāmiśraḥ śarāndhārayate daśaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें