महाभारत 4.38.30
कस्यायं सायको दीर्घः शिलीपृष्ठः शिलीमुखःवैयाघ्रकोशे निहितो हेमचित्रत्सरुर्महान्
kasyāyaṃ sāyako dīrghaḥ śilīpṛṣṭhaḥ śilīmukhaḥvaiyāghrakośe nihito hemacitratsarurmahān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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