महाभारत 4.4.12न चानुशिष्येद्राजानमपृच्छन्तं कदाचनतूष्णीं त्वेनमुपासीत काले समभिपूजयन्na cānuśiṣyedrājānamapṛcchantaṃ kadācanatūṣṇīṃ tvenamupāsīta kāle samabhipūjayanइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें