महाभारत 4.4.13असूयन्ति हि राजानो जनाननृतवादिनःतथैव चावमन्यन्ते मन्त्रिणं वादिनं मृषाasūyanti hi rājāno janānanṛtavādinaḥtathaiva cāvamanyante mantriṇaṃ vādinaṃ mṛṣāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें