महाभारत 4.4.17
यच्च भर्तानुयुञ्जीत तदेवाभ्यनुवर्तयेत्प्रमादमवहेलां च कोपं च परिवर्जयेत्
yacca bhartānuyuñjīta tadevābhyanuvartayetpramādamavahelāṃ ca kopaṃ ca parivarjayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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