महाभारत 4.4.18
समर्थनासु सर्वासु हितं च प्रियमेव चसंवर्णयेत्तदेवास्य प्रियादपि हितं वदेत्
samarthanāsu sarvāsu hitaṃ ca priyameva casaṃvarṇayettadevāsya priyādapi hitaṃ vadet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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