महाभारत 4.4.27
यस्य कोपो महाबाधः प्रसादश्च महाफलःकस्तस्य मनसापीच्छेदनर्थं प्राज्ञसंमतः
yasya kopo mahābādhaḥ prasādaśca mahāphalaḥkastasya manasāpīcchedanarthaṃ prājñasaṃmataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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