महाभारत 4.4.39
उष्णे वा यदि वा शीते रात्रौ वा यदि वा दिवाआदिष्टो न विकल्पेत स राजवसतिं वसेत्
uṣṇe vā yadi vā śīte rātrau vā yadi vā divāādiṣṭo na vikalpeta sa rājavasatiṃ vaset
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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