महाभारत 4.4.3
इन्द्रसेनमुखाश्चेमे रथानादाय केवलान्यान्तु द्वारवतीं शीघ्रमिति मे वर्तते मतिः
indrasenamukhāśceme rathānādāya kevalānyāntu dvāravatīṃ śīghramiti me vartate matiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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