महाभारत 4.4.8
दुर्वसं त्वेव कौरव्या जानता राजवेश्मनिअमानितैः सुमानार्हा अज्ञातैः परिवत्सरम्
durvasaṃ tveva kauravyā jānatā rājaveśmaniamānitaiḥ sumānārhā ajñātaiḥ parivatsaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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