महाभारत 4.41.12
स त्वं कथमिहानेन शङ्खशब्देन भीषितःविषण्णरूपो वित्रस्तः पुरुषः प्राकृतो यथा
sa tvaṃ kathamihānena śaṅkhaśabdena bhīṣitaḥviṣaṇṇarūpo vitrastaḥ puruṣaḥ prākṛto yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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