महाभारत 4.41.8
ततस्ते जवना धुर्या जानुभ्यामगमन्महीम्उत्तरश्चापि संत्रस्तो रथोपस्थ उपाविशत्
tataste javanā dhuryā jānubhyāmagamanmahīmuttaraścāpi saṃtrasto rathopastha upāviśat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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